Skip to content
final logo GALAXY

Primary Menu
  • Home
  • LATEST
  • UTTARAKHAND NEWS
  • NATIONAL NEWS
  • INTERNATIONAL NEWS
  • ARTICLES
  • STATES NEWS
  • CONTACT US
Live
  • Home
  • रासायनिक उर्वरकों का बढ़ता जाल: क्या अब बड़े सुधारों का समय आ गया है?
  • ARTICLES

रासायनिक उर्वरकों का बढ़ता जाल: क्या अब बड़े सुधारों का समय आ गया है?

Admin - Er. Kapil Garg (B.E.Electronics) January 18, 2026 1 minute read
Share This Post

By- पद्मश्री राम सरन वर्मा

भारत एक कृषि प्रधान देश है, जहाँ की एक बड़ी आबादी अपनी आजीविका के लिए सीधे तौर पर खेती पर निर्भर है।देश की बढ़ती खाद्य माँग को पूरा करने के उद्देश्य से पिछले कई दशकों से रासायनिक उर्वरकों का उपयोग निरंतर बढ़ाया गया है।शुरुआती दौर में इन उर्वरकों ने उत्पादन बढ़ाने में निश्चित रूप से मदद की, लेकिन आज इनके अंधाधुंध और अनियंत्रित उपयोग के कारण कृषि, पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य पर गंभीर संकट मंडराने लगा है।

उर्वरकों की खपत के भयावह आंकड़े
देश में रासायनिक उर्वरकों के बढ़ते उपयोग का अंदाज़ा इस तथ्य से लगाया जा सकता है कि वर्ष 2018-2019 में जहाँ 115 करोड़ बैग की खपत हुई थी, वहीं 2024-25 के दौरान यह आंकड़ा 150 करोड़ बैग को पार कर गया है।गौर करने वाली बात यह है कि भारत की जनसंख्या लगभग 143 करोड़ है, जबकि उर्वरकों की खपत 150 करोड़ बैग से भी अधिक हो चुकी है।यह असंतुलन न केवल चिंताजनक है, बल्कि भविष्य के लिए एक बड़े खतरे का संकेत भी है।

सेहत और मिट्टी पर दोहरी मार
रासायनिक उर्वरकों का असर अब हमारे थाल तक पहुँच चुका है।गेहूँ, चावल, दालें, सब्जियाँ, फल और यहाँ तक कि दूध, दही और घी भी इनके रसायनों से अछूते नहीं रहे हैं।इसके परिणामस्वरूप देश में कैंसर, हृदय घात, एलर्जी और मधुमेह जैसी गंभीर बीमारियों के मामले दिन-प्रतिदिन बढ़ रहे हैं।
खेतों की स्थिति भी कम सोचनीय नहीं है।नियमानुसार, उर्वरकों का उपयोग केवल पौधों की जड़ों के पास होना चाहिए, लेकिन पूरे खेत में इनके छिड़काव से खरपतवार की समस्या बढ़ जाती है।इस खरपतवार को खत्म करने के लिए फिर भारी मात्रा में खरपतवार-नाशक दवाओं का उपयोग होता है, जो मिट्टी की उर्वरता को नष्ट कर देती हैं।मिट्टी की खोई हुई शक्ति वापस पाने के लिए किसान और अधिक खाद डालता है, और यह दुष्चक्र हर साल मिट्टी को और अधिक बंजर बनाता जा रहा है।

अर्थव्यवस्था पर बोझ और कालाबाजारी
उर्वरक क्षेत्र में बढ़ता निवेश देश की अर्थव्यवस्था पर भी भारी पड़ रहा है।वर्तमान में देश में प्रतिवर्ष लगभग 3 लाख करोड़ रुपये (सब्सिडी सहित) के रासायनिक उर्वरकों का उपयोग हो रहा है।विडंबना यह है कि हमारा उर्वरक उद्योग 80 प्रतिशत तक विदेशी कच्चे माल या आयातित उर्वरकों पर निर्भर है।कुल 3 लाख करोड़ रुपये में से 2.5 लाख करोड़ रुपये केवल आयात में खर्च हो जाते हैं।इस प्रकार, एक ओर हमारी भूमि बंजर हो रही है, तो दूसरी ओर देश की बड़ी पूंजी विदेशों में जा रही है।
सरकार किसानों के कल्याण के लिए भारी सब्सिडी दे रही है।पिछले 10 वर्षों में लगभग 13 लाख करोड़ रुपये की उर्वरक सब्सिडी प्रदान की गई है।इसी सब्सिडी के कारण 40 रुपये प्रति किलो वाली यूरिया खाद किसानों को 6 रुपये प्रति किलो से भी कम दाम पर उपलब्ध है।स्थिति यह है कि यूरिया आज पशुओं के चारे से भी सस्ता हो गया है।सरकार 85 से 90 प्रतिशत तक सब्सिडी देती है ताकि किसानों को यूरिया एक चाय के कप से भी कम कीमत पर मिले।लेकिन इसी कम कीमत का लाभ उठाकर बिचौलिए इसकी कालाबाजारी करते हैं और कृषि के बजाय इसका उपयोग प्लाईवुड कारखानों, कैटल फीड और मिलावटी दूध बनाने में कर रहे हैं।

सुधार की राह और समाधान
इस संकट से उबरने के लिए अब ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।पहले खेतों से निकलने वाले अवशेषों का उपयोग जैविक खाद के रूप में होता था, जिससे मिट्टी का ‘जैविक कार्बन’ बना रहता था।आज इन अवशेषों को बेचने से किसानों को कुछ लाभ तो होता है, लेकिन वह रासायनिक उर्वरकों की वास्तविक लागत के मुकाबले बहुत कम है।
सरकार को चाहिए कि वह रासायनिक उर्वरकों के बैग का वजन कम कर उसकी जगह जैविक खाद के विकल्प उपलब्ध कराए।साथ ही, अत्यधिक उर्वरक उपयोग वाले क्षेत्रों को चिन्हित कर वहां विशेष निगरानी दल गठित किए जाने चाहिए।

धरती की सेहत सुधारने के लिए जरूरी सुझाव:
1. हरी खाद का अधिक इस्तेमाल:जिस तरह शरीर को स्वस्थ रखने के लिए योग आवश्यक है, उसी तरह से मिट्टी के स्वास्थ्य के लिए हरी खाद अनिवार्य है।
2. पौधों का विकास:जैविक खाद के प्रयोग से पौधों की जड़ों को फैलने और गहराई तक जाने का पर्याप्त अवसर मिलता है।
3. वैज्ञानिक फसल चक्र:एक ही तरह की फसल बार-बार उगाने के बजाय फसल चक्र बदलें।जैसे दलहनी फसलें जमीन के गहरे स्तर से पोषक तत्व लेती हैं, जबकि गेहूं और धान ऊपरी सतह से।
4. उन्नत सिंचाई तकनीक:ड्रिप इरिगेशन (टपक सिंचाई) अपनाएं और खेती से पहले भूमि को समतल करें।इससे पानी की बचत होगी और उर्वरक सीधे पौधों पर कारगर तरीके से काम करेंगे।
5. यूरिया का कुशल उपयोग:यूरिया का छिड़काव शाम के समय अधिक प्रभावी होता है, जिससे कम खाद में बेहतर परिणाम मिलते हैं।
6. पशुधन और जैविक संतुलन:पशुपालन को बढ़ावा दें ताकि गोबर की खाद का उपयोग बढ़े।इससे उत्पादन क्षमता दीर्घकालिक बनी रहेगी और मिट्टी को भी विश्राम मिलेगा।
यदि हमने आज मिट्टी नहीं बचाई, तो हमारा भविष्य भी सुरक्षित नहीं रहेगा। समय आ गया है कि हम रसायनों के इस मोह को छोड़कर प्रकृति की ओर लौटें।

About the Author

Avatar

Admin - Er. Kapil Garg (B.E.Electronics)

Administrator

Visit Website View All Posts

Post navigation

Previous: हरिद्वार में देव संस्कृति विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित ध्वज वंदन समारोह कार्यक्रम में प्रतिभाग किया CM धामी एवं केन्द्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने
Next: प्रथम बार महिलाओं द्वारा रामलीला का आयोजन तथा मंचन के लिए सभी आयोजक मातृशक्ति को सम्मानित करते कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी

Related Stories

  • ARTICLES

सिर्फ समझौता नहीं, हमारे भविष्य का रोडमैप है भारत-यूरोपीय संघ एफटीए: पीयूष गोयल

Admin - Er. Kapil Garg (B.E.Electronics) January 30, 2026
  • ARTICLES

पंचायत उन्नति सूचकांक: ग्रामीण परिवर्तन के लिए डेटा-आधारित निर्णय लेने को मजबूत करना-सुशील कुमार लोहानी

Admin - Er. Kapil Garg (B.E.Electronics) January 13, 2026
  • ARTICLES

रोजगार गारंटी में सुधारः भावनाओं के बजाय तथ्यों पर आधारित हो बहस-शैलेश कुमार सिंह

Admin - Er. Kapil Garg (B.E.Electronics) January 6, 2026

Recent Posts

  • केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह का 7 मार्च, 2026 को हरिद्वार बैरागी कैम्प में प्रस्तावित भ्रमण कार्यक्रम की तैयारियों का मुख्यमंत्री ने किया स्थलीय निरीक्षण March 3, 2026
  • भारत सरकार द्वारा मुकदमेबाजी के कुशल और प्रभावी प्रबंधन पर सम्मेलन March 2, 2026
  • उत्तराखंड CAMPA परियोजना संचालन समिति की 12वीं बैठक सम्पन्न March 2, 2026

You may have missed

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह का 7 मार्च, 2026 को हरिद्वार बैरागी कैम्प में प्रस्तावित भ्रमण कार्यक्रम की तैयारियों का मुख्यमंत्री ने किया स्थलीय निरीक्षण
  • UTTARAKHAND NEWS

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह का 7 मार्च, 2026 को हरिद्वार बैरागी कैम्प में प्रस्तावित भ्रमण कार्यक्रम की तैयारियों का मुख्यमंत्री ने किया स्थलीय निरीक्षण

Admin - Er. Kapil Garg (B.E.Electronics) March 3, 2026
भारत सरकार द्वारा मुकदमेबाजी के कुशल और प्रभावी प्रबंधन पर सम्मेलन
  • NATIONAL NEWS

भारत सरकार द्वारा मुकदमेबाजी के कुशल और प्रभावी प्रबंधन पर सम्मेलन

Admin - Er. Kapil Garg (B.E.Electronics) March 2, 2026
उत्तराखंड CAMPA परियोजना संचालन समिति की 12वीं बैठक सम्पन्न
  • UTTARAKHAND NEWS

उत्तराखंड CAMPA परियोजना संचालन समिति की 12वीं बैठक सम्पन्न

Admin - Er. Kapil Garg (B.E.Electronics) March 2, 2026
जिला प्रशासन के जनदर्शन में न्याय का भरोसा, हर शिकायत पर त्वरित एक्शन
  • UTTARAKHAND NEWS

जिला प्रशासन के जनदर्शन में न्याय का भरोसा, हर शिकायत पर त्वरित एक्शन

Admin - Er. Kapil Garg (B.E.Electronics) March 2, 2026
Copyright © All rights reserved. Subject to Dehradun Jurisdiction Only in case of any dispute. | MoreNews by AF themes.